Article 21-B: क्या बच्चों को मिलेगा शिक्षा का नया मौलिक अधिकार? जानें पूरा मामला

Article 21-B: भारत में शिक्षा के नए युग की शुरुआत?

By EXAME INSIGHTS | Updated: 2025

कल्पना कीजिए कि यदि भारत का संविधान 3 से 6 साल तक के हर बच्चे को शिक्षा और देखभाल की "संवैधानिक गारंटी" देने लगे। हाल ही में राज्यसभा में पेश किए गए एक प्रस्ताव में संविधान में आर्टिकल 21-B जोड़ने की वकालत की गई है। यह केवल एक सरकारी नीति नहीं, बल्कि बच्चों के भविष्य के लिए एक नया मौलिक अधिकार हो सकता है।

💡 मुख्य विचार: आर्टिकल 21-B क्या है?

वर्तमान में आर्टिकल 21-A के तहत 6-14 साल के बच्चों को मुफ्त शिक्षा मिलती है। प्रस्तावित आर्टिकल 21-B का लक्ष्य 3 से 6 साल की आयु के बच्चों के लिए 'प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा' (ECCE) को मौलिक अधिकार के रूप में शामिल करना है।

6 साल से पहले की शिक्षा क्यों जरूरी है?

वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि मानव मस्तिष्क का 80% विकास 6 साल की उम्र तक हो जाता है। इसी दौरान संज्ञानात्मक कौशल (Cognitive Skills) का आधार बनता है।

हेकमैन कर्व (Heckman Curve) और लाभ

  • निवेश का लाभ: ₹1 के निवेश पर समाज को 7 से 13 गुना तक लाभ मिलता है।
  • आय में वृद्धि: प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त बच्चों की भविष्य की आय में लगभग 40% तक की वृद्धि देखी जा सकती है।

संवैधानिक स्थिति: तुलना

बिंदु अभी (Art. 45) प्रस्तावित (21-B)
श्रेणी नीति (DPSP) मौलिक अधिकार
लागू? नहीं हाँ (कोर्ट द्वारा)

चुनौतियां

  1. संविधान संशोधन: संसद में विशेष बहुमत चाहिए।
  2. बजट: आंगनबाड़ियों को स्कूल बनाने में भारी खर्च।
  3. टीचर: छोटे बच्चों के एक्सपर्ट टीचर्स की कमी।

निष्कर्ष

आर्टिकल 21-B भारत के भविष्य के लिए एक बड़ा कदम है। यह बच्चों की पढ़ाई को सिर्फ एक नीति नहीं, बल्कि उनका हक बना देगा।

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