Trending

Explain social characteristics of adolescence. [Marks: 16 | Long Answer Format] (किशोरावस्था की सामाजिक विशेषताओं की व्याख्या कीजिए

B.Ed 1st Year Exam., 2023 GENDER, SCHOOL AND SOCIETY Time: 1½ hours Full Marks: 40 D Instructions: (i) The marks are indicated in the right-hand margin. (i) There are SIX questions in this paper. (ii) Question No. 1 (attempt any FIVE out of EIGHT) is compulsory. (iv) Attempt any THREE questions out of the rest FIVE questions. 1. Answer any five questions of the following: 2×5-10 निम्नलिखित में से किन्हीं पाँच प्रश्नों के उत्तर दीजिए: (a) Define gender. जेन्डर को परिभाषित कीजिए। (b) What is masculinity? पुरुषत्व क्या है? (c) Define gender bias. जेन्डर पक्षपात को परिभाषित कीजिए।

Q5. What are the special problems of Indian adolescents? How would you help adolescents to meet these problems? [Marks: 16 | Long Answer Format] (भारतीय किशोरों की कौन-कौन-सी विशेष समस्याएँ हैं? इन समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए आप किशोरों की किस प्रकार सहायता कर सकते हैं?)

PRACTICE

(French East India Company)

भारत-न्यूजीलैंड ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौता (FTA): एक नई शुरुआत

भारत और न्यूजीलैंड के बीच ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौता (FTA): विकास की नई उड़ान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन – ऐतिहासिक FTA की घोषणा के दौरान

22 दिसंबर 2025 को भारत और न्यूजीलैंड ने मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की वार्ताएं सफलतापूर्वक पूरी होने की घोषणा की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने एक टेलीफोनिक बातचीत के दौरान इसकी पुष्टि की। यह समझौता दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को मजबूत करने का एक महत्वपूर्ण कदम है।

यह FTA मात्र 9 महीनों में पूरा हुआ, जो दोनों पक्षों की मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति को दर्शाता है। वार्ताएं मार्च 2025 में लक्सन की भारत यात्रा के दौरान शुरू हुई थीं।

मुख्य विशेषताएं

  • व्यापार पहुंच: न्यूजीलैंड ने भारत के 100% निर्यात पर शून्य शुल्क (जीरो ड्यूटी) की सुविधा दी है। इससे भारत के कपड़ा, रत्न-आभूषण, चमड़ा, जूते, इंजीनियरिंग सामान, ऑटोमोबाइल, दवाइयां और हैंडीक्राफ्ट जैसे क्षेत्रों को बड़ा लाभ मिलेगा।
  • न्यूजीलैंड के लिए लाभ: भारत ने न्यूजीलैंड के 95% निर्यात पर शुल्क कम या खत्म करने का वादा किया है, जिसमें आधे से अधिक उत्पाद पहले दिन से ड्यूटी-फ्री होंगे। न्यूजीलैंड के सेब, कीवी फ्रूट, मैनुका शहद और अन्य कृषि उत्पादों को प्राथमिकता मिलेगी।
  • निवेश: न्यूजीलैंड अगले 15 वर्षों में भारत में 20 बिलियन अमेरिकी डॉलर का निवेश करेगा, मुख्य रूप से विनिर्माण, बुनियादी ढांचा, नवाचार और रिन्यूएबल एनर्जी क्षेत्रों में।
  • प्रतिभा और वीजा:
    • भारतीय पेशेवरों (आईटी, स्वास्थ्य, इंजीनियरिंग, योग प्रशिक्षक, रसोइये आदि) के लिए अस्थायी रोजगार वीजा की सुविधा।
    • भारतीय छात्रों को पढ़ाई के दौरान प्रति सप्ताह 20 घंटे काम करने और पढ़ाई के बाद 4 साल तक वर्क वीजा की अनुमति।
  • कृषि सहयोग: सेब, कीवी और शहद जैसे उत्पादों के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किए जाएंगे, जो भारतीय किसानों की उत्पादकता बढ़ाएंगे।

संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा

भारत ने अपने छोटे किसानों और घरेलू उद्योगों की रक्षा के लिए डेयरी (दूध, पनीर, मक्खन, योगर्ट), चीनी, मसाले, कॉफी, कुछ सब्जियां, एडिबल ऑयल्स और रबर जैसे उत्पादों को समझौते से बाहर रखा है। न्यूजीलैंड की कंपनियां भारत में डेयरी कच्चे माल लाकर प्रोसेस कर सकती हैं, लेकिन केवल पुन: निर्यात के लिए, जिससे घरेलू बाजार पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

न्यूजीलैंड में राजनीतिक प्रतिक्रिया

समझौते की घोषणा के बाद न्यूजीलैंड में कुछ विरोध भी हुआ। गठबंधन सहयोगी न्यूजीलैंड फर्स्ट पार्टी के नेता और विदेश मंत्री विंस्टन पीटर्स ने इसे "न तो स्वतंत्र है और न ही निष्पक्ष" बताया। उनका मुख्य विरोध डेयरी क्षेत्र को बाहर रखने और आप्रवासन पर दी गई रियायतों पर है। हालांकि, प्रधानमंत्री लक्सन ने इसे दोनों देशों के लिए लाभकारी बताया है।

निष्कर्ष और प्रभाव

यह समझौता भारत के विकसित भारत 2047 विजन के अनुरूप है। दोनों देशों का अनुमान है कि अगले 5 वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार दोगुना होकर कई गुना बढ़ सकता है। वर्तमान में दोनों देशों के बीच व्यापार लगभग 1.3-1.8 बिलियन डॉलर का है, और यह समझौता इसे नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा।

औपचारिक हस्ताक्षर 2026 की पहली तिमाही में होने की उम्मीद है।

यह FTA वास्तव में दो अलग-अलग महाद्वीपों के बीच एक मजबूत पुल की तरह है—एक तरफ पूंजी और तकनीक का प्रवाह, दूसरी तरफ प्रतिभा और उत्पादों का—जिससे दोनों अर्थव्यवस्थाएं एक-दूसरे की पूरक बनेंगी।

Previous Post Next Post

Contact Form